Hindi Poetry

जान और संसद

एक आदमी
जान से मर रहा है
एक आदमी जान बचा रहा है
एक तीसरा आदमी भी है
जो ना जान बचाता है, ना कोशिश करता है
वह सिर्फ़ दूसरों की जान से खेलता है
मैं पूछता हूँ–
‘यह तीसरा आदमी कौन है ?’
मेरे देश की संसद मौन है।

  • धूमिल की कविता रोटी और संसद से प्रेरित
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टफी जी और लॉकडाउन

नेताजी की पत्नी जब ब्याह कर आयी तो अपने संस्कारों का प्रमाण पत्र, टफी जी के रूप में लेकर आई । एक बहुचर्चित फिल्म के कारण दुनिया के सारे ‘टफी’ सबसे संस्कारी कुत्ते कहलाने लगे थे। उस फिल्म के हीरो को भी जानवरों से खूब प्यार था। खैर वो तो किसी और दिन की बात है। अभी आते हैं टफी जी पर, जिनको नेताजी अपने बच्चे से ज़्यादा चाहते थे, अब बच्चा तो आगे या पीछे अब्रॉड ही सैटल होने वाला था, टफी जी ही नेताजी के श्रवण कुमार थे इसलिए उनकी खिदमत बिलकुल राजकुमारों जैसे होती थी। उनके खाने का मासिक खर्च नौकर की सैलरी से दुगना था। टफी जी को भी अपने मम्मी डैडी की सेहत का खूब खयाल था, इसलिए उन्होंने भौंक भौंक कर बंगले की पीछे की जमीन पर टेहलने के लिए एक बाग़ बनवाया, जो सरकारी कागजों में कोई स्कूल बनाने के लिए अलॉट हुई थी। खैर स्कूल बनाके किसने चुनाव जीता है?…टफी जी हाई मेनटेनेंस की चरम सीमा पर मूतते थे, वे टांग उठाते भी थे तो सिर्फ सरकारी गाड़ी के टायर के सामने या सरकारी जीप की सीट पर। एक बार तो भूचाल ही आ गया था जब टफी जी ने सीट पर किसी हरे पट्टे वाले कुत्ते की बू सूंघ ली। ड्राइवर की नौकरी तो गई ही, पर सारी मीडिया के सामने एक शुद्धिकरण की पूजा भी कराई गई।

एक दिन टफी जी को बाग़ में घूमते हुए एक छिंक आई और नेताजी ने अपने इलाके में लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन में सबसे पहले तो नेताजी ने सारे हरे पट्टे वाले कुत्तों को मोहल्ले से भगाया। फिर टफी जी को नाश्ते में वो काजग खिला दिए जो पांच हफ्ते पहले WHO से आए थे। एक तरफ नेता जी ने आवारा कुत्तों की मदद के लिए योजना तैयार की और दूसरी तरफ टफी जी को इन्फ्लूंसर बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। एक तरफ फंड आते गए, दूसरी तरफ टफी जी लोगों को डोग हाउस बनाना सीखाते गए। जब PPE kit नेता जी के पास पहुंचे तो एक एन९५ मास्क टफी जी के भी हिस्से आया, बहुत से डॉक्टर्स के पहले। देश के सबसे बड़े न्यूज चैनल ने टफी जी का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू लिया पर बीच इंटरव्यू में उन्हें लघू शंका हुई और वह बाग़ की तरफ भागे जहां नेताजी की नई मूर्ति बन रही थी, बस फिर क्या था टफी जी ने टांग उठाई और…

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मध्य प्रदेश और कोरोना

कहानी शुरू होती है दिल्ली से
जब नेताजी ने विधायकों की बोली लगाई
और टीवी पर बोले, ‘कोरोना वोरोना कुछ नहीं होता’
सियासी मूजिकल चेयर में
जनता का तानपुरा बजना शुरू हुआ
दूसरी तान दी,
वॉट्सएप यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले लोगों ने जिन्होंने २०२० में ना जाने कौनसा वर्ल्ड कप जीता
तीसरी तान दी मौलवी ने
जिसने धर्म की ऐसी गलत पट्टी पढ़ाई
की टिकटोक भाग्यविधता बन गया
और जाहिलों ने डॉक्टर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी
और आखिर में सबसे ऊंची तान दे रहे है
स्वास्थ के व्यापारी जो इस खतरे के समय भी
टेस्टिंग की गति बढ़ाने के बजाए
व्यापम के एहसान गिना रहे हैं
और लोगों की जान को धंधा समझ बैठे हैं,
इस मूर्खता के शोरगुल के बीच
मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मचारी, पोलिस
मजदूरों को खाना पहुंचाने वाले लोग
पीपीई किट वितरण करने वाले लोग
और आप सब जो घर में बैठें हैं
उन्हें मैं प्रणाम करता हूं
एक दूसरे का ख्याल रखें
ज़ी न्यूज़ हटाकर ज़ी सिनेमा देखें
वॉट्सएप पर मूर्खता से दूर रहें
और हाथ धोते रहें।