एक नन्ही रूह का पैग़ाम

आज देल्ही पब्लिक स्कूल के बच्चे के ख़्वाब में
आर्मी स्कूल, पेशावर के बच्चे की रुह आई।
उसने कहा की जिन बच्चों के पापा आर्मी मैं है,
उनको मेरी तरफ से एक पैग़ाम देना।
सियासत ने उन्हें गुमराह किया है।
उन्हें सीमा पर पता नहीं क्यों भेजा है,
असल में दहशत सीमा पर नहीं हमारे घरों में ही हो रही है।
वहाँ ये लोग ज़मीन के एक टुकड़े के लिए लड़ रहे हैं,
यहाँ हम दहशतगर्दो के हाथों मर रहे हैं।
मुझे यह समझ नहीं आता हम आपस में ही क्यों लड़ते हैं,
तालिबानी जैसे डरपोक से क्यों डरते हैं।
पेशावर हो या मुम्बई,
लाहौर हो या दिल्ली,
यह लोग उड़ाते हैं हमारी जान की खिल्ली।
बस अब बहुत हुआ,
हमें आपस में लड़ना बंद करना होगा,
साथ मिलकर इन जानवरों को काबू में करना होगा।
हैवानियत की इस बारिश से बचने के लिए,
छाते को एकता के रंगों से भरना होगा।

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